अहमद सलमान: जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे काव्य डेस्क
तूफ़ान सा उठा था सांसों में , धड़कनों को
दिल टूटा है मगर शिकायत नहीं की,क्योंकि जिस पर भरोसा था, उसी ने तोड़ा है।
आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं
जिसे जानते तो बहुत लोग है, मगर समझते कोई नही..
नसीब बालो को मिलते हैफ़िक्र करने बाले, मेरा नसीब देखो मुझे तुम मिल गए।
तेरी बेवफ़ाई का अफ़सोस तो रहेगा उम्र भर,मगर अब तुझसे कोई शिकायत भी नहीं।
यह नया वर्ष उन्हें सच कर जाए;आप के लिए यही है हमारी शुभकामनायें!
और बताओ तुम्हें मोहब्बत का क्या सबूत चाहिए तुम्हें?एक लापरवाह लड़का तुम्हारी परवाह कर रहा है॥
वरना पूरी जिंदिगी गुज़र जाएगी ?रोने में।
जब अपनी अपनी मोहब्बतों के अज़ाब झेले तो लोग समझे
मत पूछो दोस्तों ये इश्क़ कैसा होता है,जो रुलाता है नाउसके ही गले लग के रोने Trending Shayari को जी चाहता है…
“वक्त सबको मिलता है जिंदगी बदलने के लिए, पर जिंदगी दोबारा नहीं मिलती वक्त बदलने के लिए।”
न पगली तुझसे अच्छे तो मेरे दुश्मन हैं,जो हर बात पर कहतें है, तुझे नही छोड़ेंगे।